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भारतीय विनिर्माण में एआई का विस्तार: डेटा और लेगेसी सिस्टम की चुनौतियां और भविष्य
9/15/2026
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भारतीय विनिर्माण क्षेत्र, जो वर्तमान में 'मेक इन इंडिया' और ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी भूमिका को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अपनाने में महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना कर रहा है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं (SMEs) के लिए, एआई का एकीकरण केवल एक तकनीकी निवेश नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक चुनौती बन गया है। हालिया रिपोर्टों से स्पष्ट है कि डेटा की गुणवत्ता में कमी और पुराने लेगेसी सिस्टम (Legacy Systems) इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने में सबसे बड़ी बाधा हैं।
उद्योग पर प्रभाव का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि अधिकांश छोटे कारखानों में डिजिटलीकरण का अभाव है। मशीनों से वास्तविक समय (real-time) में डेटा एकत्र करने के लिए आवश्यक सेंसर और आईओटी (IoT) बुनियादी ढांचे की कमी है, जिसके कारण एआई एल्गोरिदम के लिए आवश्यक 'क्लीन डेटा' नहीं मिल पाता है। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे छूटने के जोखिम का सामना कर रही हैं। यह न केवल उनकी परिचालन दक्षता को प्रभावित करता है, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण और पूर्वानुमानित रखरखाव (predictive maintenance) जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं को भी बाधित करता है।
सप्लाई चेन के दृष्टिकोण से, यह स्थिति एक दोधारी तलवार है। बड़ी वैश्विक कंपनियां जो भारतीय एमएसएमई से कलपुर्जे लेती हैं, वे अब अपने आपूर्तिकर्ताओं से एआई-आधारित पारदर्शिता और दक्षता की मांग कर रही हैं। यदि छोटे निर्माता इन मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं, तो वे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से बाहर हो सकते हैं। हालांकि, इसमें एक बड़ा अवसर भी छिपा है। सेमीकंडक्टर और एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) समाधान प्रदान करने वाली कंपनियों के लिए यह बाजार बेहद आकर्षक है। यदि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में 'स्मार्ट फैक्ट्री' समाधानों को किफायती तरीके से पेश किया जाए, तो यह छोटे निर्माताओं के लिए कायापलट साबित हो सकता है।
भविष्य के दृष्टिकोण से, सरकार को 'इंडस्ट्री 4.0' पहल के तहत एमएसएमई के आधुनिकीकरण के लिए सब्सिडी और तकनीकी परामर्श पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अगले पांच वर्षों में, जो निर्माता अपने लेगेसी सिस्टम को एआई-रेडी बनाएंगे, वही वैश्विक बाजार में अपनी जगह सुरक्षित रख पाएंगे। कुल मिलाकर, भारतीय विनिर्माण को अब 'हार्डवेयर' से 'हार्डवेयर और डेटा के एकीकरण' की ओर बढ़ने की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा तकनीकी खाई और गहरी होती जाएगी।
