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सिलिकॉन फोटोनिक्स में बड़ी क्रांति: 200 Gb/s मॉड्यूलेटर और DSP पर निर्भरता में कमी
10/26/2026
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हाल ही में इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस टोक्यो, योकोहामा नेशनल यूनिवर्सिटी, AIST और PETRA के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित 'बिल्ट-इन इलेक्ट्रो-ऑप्टिक (EO) इक्वलाइज़र' युक्त सिलिकॉन मॉड्यूलेटर सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। डेटा सेंटर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) वर्कलोड की बढ़ती मांग के कारण 800G और 1.6T ऑप्टिकल इंटरकनेक्ट्स की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक सिलिकॉन माक-ज़ेंडर मॉड्यूलेटर (MZM) अक्सर उच्च ऊर्जा खपत और बड़े आकार की बाधाओं का सामना करते हैं, जिसके लिए जटिल डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग (DSP) की आवश्यकता होती है। यह नई तकनीक इसी चुनौती को संबोधित करती है।
उद्योग पर प्रभाव: यह शोध कार्य सीधे तौर पर 'पावर-हंग्री' DSP की आवश्यकता को कम करता है, जो वर्तमान में ऑप्टिकल ट्रांसीवर का सबसे महंगा और ऊर्जा खपत करने वाला हिस्सा है। 200 Gb/s प्रति तरंगदैर्ध्य (λ) पर PAM4 सिग्नलिंग का प्रदर्शन करना यह दर्शाता है कि अब हम छोटे, अधिक कुशल और सस्ते ट्रांसीवर बनाने के करीब हैं। इससे न केवल डेटा सेंटर का कुल बिजली बिल कम होगा, बल्कि ऑपरेशंस के थर्मल प्रबंधन में भी सुधार होगा।
सप्लाई चेन और व्यापारिक निहितार्थ: आपूर्ति श्रृंखला के नजरिए से, यह नवाचार सिलिकॉन फोटोनिक्स इकोसिस्टम को और अधिक परिपक्व बनाएगा। वर्तमान में, उच्च-प्रदर्शन वाले DSP की सीमित उपलब्धता और उच्च लागत उद्योग के लिए एक बड़ी बाधा है। यदि मॉड्युलेटर का हार्डवेयर स्वयं ही EQ क्षमताएं प्रदान करने लगे, तो चिपमेकर्स को अपने ट्रांसीवर डिजाइन में लचीलापन मिलेगा। यह AIST और PETRA जैसे संस्थानों के साथ मिलकर काम करने वाली फाउंड्रीज के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करता है।
भविष्य का दृष्टिकोण: भविष्य में, हम देखेंगे कि कम जटिलता वाले ट्रांसीवर AI डेटा सेंटर्स के भीतर 'चिपलेट-आधारित' आर्किटेक्चर में एकीकृत हो जाएंगे। यह तकनीक सिलिकॉन फोटोनिक्स के व्यापक अपनाने की गति को तेज करेगी, जिससे 2026-2027 तक अगली पीढ़ी के ऑप्टिकल नेटवर्किंग हार्डवेयर में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिलेंगे। संक्षेप में, यह विकास उस ऊर्जा-कुशल भविष्य की नींव है जिसे AI की असीमित कंप्यूटिंग जरूरतों के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
